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प्रभु श्रीराम के गुणों का अध्ययन कर जीवन में आचरण करने में ही हमारा हित - ବିଶ୍ୱ ସମ୍ବାଦ କେନ୍ଦ୍ର ଓଡିଶା

प्रभु श्रीराम के गुणों का अध्ययन कर जीवन में आचरण करने में ही हमारा हित

नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संस्कृति हमारे जीवन का अविभाज्य अंग है, उसका पालन करने से ही व्यक्ति तथा समाज का सर्वांगीण विकास संभव है. उन्होंने कहा कि यदि आप सत्कर्म कर रहे हैं, तो आपके कर्तृत्व को परमेश्वर का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है.

सरसंघचालक जी रामरावजी खोंडे वारकरी सेवाश्रम द्वारा हिंगणा तहसील के मोहगाव (ढोले) स्थित विठ्ठल रुक्मिणी मंदिर में रामरावजी खोंडे पुण्यतिथि कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम के दौरान मंच पर पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. शरद गडाख, पूर्व कुलगुरू डॉ. व्यंकट मायंदे, पूर्व कुलगुरू डॉ. शरद निंबाळकर, महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय नागपुर के कुलगुरू डॉ. नितीन पाटील, विश्वविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. रमेश कुकडे, कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व संचालक (विस्तार शिक्षण) डॉ. सुरेश खोंडे उपस्थित रहे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि कृषि का वर्तमान चित्र यदि बदलना है तो पारंपरिक और आधुनिक खेती के बीच समन्वय आवश्यक है. खेती से अच्छी आमदनी करनी है, तो केवल विश्वविद्यालयों और सरकार पर निर्भर ना रहते हुए प्रयोगशील कृषकों से बारबार संवाद करना आवश्यक है. कृषि के सम्मुख परेशानियों पर मात करने हेतु सबका सहभाग भी आवश्यक है. उन्होंने विश्वास जताया कि कृषि हेतु अभी अच्छा समय है एवं आगे और भी बेहतर दिन आएंगे.

उन्होंने सुझाव दिया कि कृषि उपज के साथ ही आय वृद्धि हेतु मुर्गी पालन, बकरी तथा भेड़ पालन, दुग्धोत्पादन आदि अन्य स्रोतों को भी अपनाएं. उन्होंने कहा कि किसान हिम्मत न हारें, बल्कि अपने कार्य के प्रति समर्पित हो जुटने की आवश्यकता है. कृषि कोई व्यवसाय नहीं, अपितु किसानों का धर्म है. ये बात यदि हम जान सके तो खेती की कई समस्याएं अपने आप सुलझने लगेंगी. प्रभु श्रीरामचंद्र के गुणों का अध्ययन कर अपने जीवन में आचरण करने में ही हमारा हित है.

कार्यक्रम में किसान, श्रद्धालु, भजन मंडली के सदस्य तथा वारकरी उपस्थित रहे. इस अवसर पर सरसंघचालक जी ने रामरावजी खोंडे के पुत्र डॉ. रमेश खोंडे को सम्मानित किया. सम्मान पत्र का वाचन डॉ. रमेश कुकडे ने किया. अतिथियों ने डॉ. वामन पवार, प्रा. शंकरराव धुर्वे, मोरेश्वर कोहळे एवं लालाजी देशभ्रतार आदि का सत्कार किया.

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