- चर्च मुक्त ओडिशा के आह्वान के बीच मुख्यमंत्री ने दी कड़ी चेतावनी
- स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर आधारित पुस्तक के विमोचन समारोह में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने की कई घोषणाएं
- आश्रम के लिए ₹13 करोड़ मंजूर, सभी विश्वविद्यालयों में कार्यशाला और पुस्तकालयों में पुस्तक उपलब्ध कराने का ऐलान
भुवनेश्वर। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती पर आधारित पुस्तक ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती : व्यक्ति व कृतित्व’ के विमोचन समारोह में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि सनातन केवल जीवन नहीं, बल्कि जीवन-यापन का आधार है और हिंदुत्व भारत की आत्मा है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को कमजोर करने और उसकी पहचान को बदलने की साजिश रची जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री के संबोधन से कुछ देर पहले इसी मंच से ओडिशा को चर्च मुक्त बनाने का आह्वान भी किया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का संपूर्ण जीवन वनवासी समाज, सनातन संस्कृति और गौ संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि स्वामी जी हिमालय की तरह अडिग होकर हिंदुत्व, गौ संरक्षण और वनवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए खड़े रहे। उनके जीवन और त्याग पर आधारित यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जनजातीय और वनवासी समाज के लिए पिता तुल्य थे। उन्होंने वनवासी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया, शिक्षा और संस्कार के माध्यम से उन्हें नई दिशा दी तथा कंध समुदाय की संस्कृति और पहचान को सुरक्षित रखने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की निर्मम हत्या पूरे समाज के लिए पीड़ादायक घटना थी। उन्होंने कहा कि उस समय की सरकार उन्हें पर्याप्त सुरक्षा देने में विफल रही। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट को खोजने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही इस मामले की अपराध शाखा
द्वारा जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में “कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की स्मृति से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने बताया कि कंधमाल में स्वामी जी के आश्रम के विकास के लिए ₹13 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अलावा राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन, दर्शन और योगदान पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी तथा उनकी जीवनी पर आधारित पुस्तक राज्य के सभी पुस्तकालयों में उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने समाज से स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के आदर्शों का अनुसरण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सेवा, संस्कार और हिंदुत्व के मार्ग पर चलकर ही समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वामी जी का जीवन त्याग, समर्पण और राष्ट्रसेवा का ऐसा उदाहरण है, जो सदैव समाज का मार्गदर्शन करता रहेगा।
समारोह में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी, बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास के न्यासी मनसुखलाल सेठिया ने किया।