शुद्धि आंदोलन के प्रखर नायक स्‍वामी श्रद्धानंद जी

https://www.rss.org/hindi/Encyc/2026/11/4/abkm-statement-by-sarkaryavah-ji.html

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राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ
अखिल भारतीय कार्यकारी मण्‍डल 2026
2,3,4 नवम्‍बर 2026, इन्‍दौर
 
सरकार्यवाह दत्‍तात्रेय होसबाले जी का वक्‍तव्‍य
 
शुद्धि आंदोलन के प्रखर नायक स्‍वामी श्रद्धानंद जी
 
स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद, समाज-सुधारक, धर्म प्रचारक और शुद्धि आंदोलन के प्रखर नायक स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान के 100 वर्ष पूर्ण होने के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उन्हें आदरपूर्वक स्मरण करता है। पंजाब के जालंधर जिले के तलवन ग्राम में जन्मे स्वामीजी संन्यास दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात्‌ समाज जागरण के विविध कार्यों में जुट गए।
 
भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर अंग्रेजों द्वारा किये जा रहे कुठाराघात का निर्भयता से सामना करने हेतु उन्होंने हरिद्वार क्षेत्र में गुरुकुल काँगड़ी की स्थापना कर उसे भारतीय शिक्षा दृष्टि के आधार पर एक वैकल्पिक शिक्षा संस्था के रूप में विकसित किया। भारतीय संस्कृति, वेदों सहित समस्त भारतीय वांग्मय और आधुनिक समकालीन विषयों के अध्ययन के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी गुरूकुल काँगड़ी की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
 
भ्रान्त धारणाओं के कारण पिछड़ी जातियों के लोगों को न केवल केरलम् “वैकम” के शिव मंदिर में प्रवेश करने से, अपितु मंदिर के चारों ओर के सार्वजनिक मार्गों पर चलने से भी वंचित रखा गया था। इस भेद-भाव के विरुद्ध ‘वैकम’ में एक ऐतिहासिक आंदोलन किया गया था। इस राष्ट्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण आंदोलन में स्वामी श्रद्धानंद जी स्वयं सहभागी हुए। इस महत्‌ कार्य हेतु वे श्री नारायण गुरु से भी मिले थे। सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति कार्य में उनकी सक्रियता के कारण भारतरत्‍न डॉ. बी. आर. आम्बेडकर भी उन्हें सामाजिक और आर्थिक दुर्बल वर्गों का एक महान और सच्चा हितैषी मानते थे।
 
स्वतंत्रता आंदोलन में समाज जागृति हेतु उन्होंने ‘सद्धर्म प्रचार’, ‘तेज’, ‘वीर अर्जुन’ और ‘लिब्रेटर’ नामक पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन प्रारम्भ कर अंग्रेजों के झूठ, कपटऔर षड़यंत्रों को उजागर करते हुए निर्भीक, अडिग और सिद्धांतनिष्ठ पत्रकारिता के प्रतिमान प्रस्तुत किये।
 
विषम परिस्थितियों, भ्रान्त सामाजिक व धार्मिक मान्यताओं के कारण हिन्दू समाज निरंतर मतान्तरण का शिकार हो रहा था, ऐसे मतान्तरित लोगों की पुन: हिन्दू धर्म में वापसी के द्वार बंद थे। ऐसी परिस्थिति में स्वामी जी ने शुद्धि आंदोलन के माध्यम से मतान्तरित हिन्दुओं को अपने धर्म में वापस लाने का कार्य शुरू किया। मोपला नरसंहार के बाद स्वामी जी ने शुद्धि आंदोलन के द्वारा केरल सहित सारे देश में हजारों लोगों की घरवापसी की।
 
पुरुषार्थ और परमार्थ को पूरी प्रखरता और प्रामाणिकता से प्रकट करने के उनके निरंतर प्रयासों से विचलित होकर 23 दिसम्बर 1926 को अब्दुल रशीद नामक एक मतांध व्यक्ति द्वारा दिल्‍ली में उनकी दुर्भाग्यपूर्ण हत्या कर दी गई। कर्मण्यता के प्रेरणा पुरुष स्वामी श्रद्धानंद जी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित करता है तथा उनके जीवनकार्य से प्रेरणा लेकर धर्मरक्षा के लिए सदैव सक्रिय रहने का संकल्प लेने का सभी से आग्रह करता है।

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